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शहीद खेम चन्द्र डोर्बी की 12वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर शहीद के अदम्य साहस और बलिदान को किया नमन


6 सितम्बर,राजेश पन्त बेतालघाट,नैनीताल। खेम चन्द्र डोर्बी की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय बेतालघाट स्थित शहीद खेम चन्द्र डोर्बी स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर शहीद के अदम्य साहस, वीरता और देश के लिए दिए सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

शहीद के भाई रंजन डोरबी माल्यार्पण करते हुए

[9/6, 7:33 PM] Hns Rajesh Pant: देव भूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष तारा सिंह भंडारी मालार्पण करते हुए
देव भूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष तारा सिंह भंडारी मालार्पण करते हुए
कार्यक्रम में सेना से सेवानिवृत्त सैनिक संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष जगमोहन बिष्ट सहित पंचायत सदस्य संजय बोहरा,सामाजिक कार्यकर्त्ता दीप रिखाडी,विनोद तिवारी,हरीश पाण्डेय, दलीप नेगी, बालम बोहरा,मंडल अध्यक्ष तारा भंडारी,उत्तराखंड क्रांति दल के ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र रावत,अध्यापक राजेंद्र जोशी,कांग्रेस ब्लॉक किसान संगठन अध्यक्ष राजेंद्र महरा तथा शहीद खेम चन्द्र डोर्बी के छोटे भाई रंजन डोर्बी सपरिवार सहित व क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

 

मंच का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शंकर जोशी,देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष तारा भंडारी ने किया।

बताते चलें कि शहीद खेम चन्द्र डोर्बी का जन्म 15 अगस्त 1976 को बेतालघाट ब्लॉक के चन्द्रकोट गांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। उनके पिता लीलाधर डोर्बी भारतीय सेना में सेवारत थे।

पिता की देश सेवा से प्रेरित होकर खेम चन्द्र डोर्बी के मन में भी बचपन से ही राष्ट्र सेवा का जज्बा जागा। इंटरमीडिएट की शिक्षा बेतालघाट से पूर्ण करने के बाद उनका चयन भारतीय सेना में हो गया। वे शुरू से ही मेधावी छात्र और साहसी व्यक्तित्व के धनी थे।

वर्ष 2014 में जम्मू-कश्मीर में आई भीषण बाढ़ के दौरान सैम्बुर जिले के काकपुर गांव में सैकड़ों लोग बाढ़ में फंस गए थे।

लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान में खेम चन्द्र डोर्बी को उनके साहस और जज्बे को देखते हुए सक्रिय दल का प्रमुख सदस्य बनाया गया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नाव के माध्यम से काकपुर गांव में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

बचाव अभियान के दौरान कुछ और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जाते समय तेज बाढ़ के प्रचंड बहाव में उनकी नाव पलट गई।

6 सितंबर 2014 को देश और मानवता की सेवा करते हुए खेम चन्द्र डोर्बी वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी वीरता और अदम्य साहस को देखते हुए भारतीय सेना ने उन्हें मरणोपरांत गैलेंट्री सम्मान से नवाजा।

शहीद खेम चन्द्र डोर्बी के परिवार में उनकी माता भवानी देवी,पिता लीलाधर डोर्बी,पत्नी वीरांगना प्रेमा सहित दो छोटे बच्चे—पुत्री साक्षी डोर्बी और पुत्र आदित्य डोर्बी के साथ साथ दो छोटे भाई में एक नीरज डोर्बी भारतीय सेना में रंजन डोर्बी सपरिवार है l परिवार के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति था, लेकिन देश की सेवा में दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।

शहीद खेम चन्द्र डोर्बी का बलिदान आज भी बेतालघाट क्षेत्र के युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करता है। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीण रहेगा।
देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले खेम चंद के नाम से आवंटित महाविद्यालय की दशा देखकर प्रशासन द्वारा सम्मान नियमावली पर प्रश्न उठते हैं। महाविद्यालय के स्टॉफ से इस गौरवशाली दिवस पर किसी ने भी भाग नही लिया और शहीद स्मारक भी जंगली झाड़ियों से भरा होने से सामाजिक कार्यकर्ता भी शहीद के सम्मान में हुई इस अव्यवस्था से अंसतोष व्यक्त किये।

 

शहीद स्मारक पर झाड़ियों से नाराज सामाजिक कार्यकर्ता

 


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