📰 शिक्षा संकाय में ‘युवा पीढ़ी, परिवार एवं विश्वशांति’ पर एकदिवसीय संगोष्ठी आयोजित
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में ‘युवा पीढ़ी, परिवार एवं विश्वशांति’ विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन ब्रह्मा कुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के दिशा-निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक दिशा देना, अवसाद से उबारना, नशा मुक्त समाज की स्थापना और परिवारों के बदलते स्वरूप पर चिंतन करना रहा।
संगोष्ठी में मुख्य व्याख्यानदाता ब्रह्मा कुमारीज़ की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके गीता दीदी रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. भीमा मनराल ने की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. भीमा मनराल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समाज में विखंडन बढ़ा है, ऐसे में आध्यात्मिक विचार ही विश्वशांति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने और जीवन मूल्यों पर चलने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक (DRDO) डॉ. एच. के. पांडेय ने ब्रह्मा कुमारीज़ के सिद्धांतों एवं कार्यों की जानकारी दी।
मुख्य वक्ता बीके गीता दीदी ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज की युवा पीढ़ी छोटी-छोटी परेशानियों में बाहर समाधान ढूंढती है, जबकि असली समाधान भीतर है। उन्होंने कहा कि ध्यान और राजयोग के माध्यम से व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी स्वयं को संतुलित रख सकता है। उन्होंने परिवारों में संवाद की कमी और बदलती जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं को आत्मचिंतन और ध्यान से जुड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं रूपरेखा प्रस्तुति डॉ. संगीता पवार द्वारा की गई। उन्होंने शिक्षा संकाय एवं लक्ष्मी देवी टम्टा महिला अध्ययन केंद्र की गतिविधियों की जानकारी भी साझा की।
संगोष्ठी में ब्रह्मा कुमारीज़ से जुड़े वंदना (सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक, DRDO), डॉ. एच. के. पांडेय, रश्मि पंत, भारती जोशी, सावित्री सांगा, नीमा जोशी, कमला धपोला, पंकज, अजय तिवारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय के डॉ. नीलम, डॉ. ममता असवाल, डॉ. भाष्कर चौधरी, डॉ. सरोज जोशी, डॉ. अंकिता, डॉ. ललिता रावल, डॉ. मनोज कुमार टम्टा, मीडिया प्रभारी डॉ. ललित जोशी एवं बी.एड के छात्र-छात्राएं भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
👉 संगोष्ठी के माध्यम से युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिकता के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया गया।

