Swami Manmathan की पुण्यतिथि (6 अप्रैल) पर पूरे Uttarakhand सहित देशभर में उन्हें श्रद्धा के साथ याद किया गया। समाज सुधार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को आज भी लोग सम्मान के साथ याद करते हैं।
केरल में जन्मे स्वामी मन्मथन ने गढ़वाल क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाया और अपना संपूर्ण जीवन समाज के पिछड़े वर्गों, विशेषकर महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। वर्ष 1977 में उन्होंने Shri Bhuvneshwari Mahila Ashram की स्थापना की, जो आज भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
स्वामी मन्मथन ने Chandrabadni Temple में प्रचलित पशु बलि जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक सशक्त आंदोलन चलाया, जिससे समाज में जागरूकता आई और गरीब परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ।
उन्होंने “महिला एक व्यक्ति हैं” और “शिक्षा से चेतना, चेतना से विकास” जैसे विचारों के माध्यम से समाज में नई सोच को जन्म दिया। इसके अलावा, शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
6 अप्रैल 1990 को उनकी हत्या कर दी गई, जो गढ़वाल क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। हालांकि, उनके विचार और कार्य आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं।
आज उनकी पुण्यतिथि पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

