पौड़ी, 23 अगस्त 2026 । उत्तराखंड एकता मंच ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची (Fifth Schedule) लागू करने तथा गढ़वाली-कुमाऊँनी समुदाय को ट्राइब स्टेटस देने की मांग को लेकर पौड़ी गढ़वाल में बैठक आयोजित की।
मंच के सह-संयोजक प्रवेश जोशी जी ने कहा कि देश के अन्य 12 हिमालयी राज्यों के मूल निवासियों को ट्राइब स्टेटस मिला हुआ है, लेकिन उत्तराखंड के पर्वतीय समुदाय को इससे वंचित रखकर उनके साथ ऐतिहासिक अन्याय किया गया है।
उन्होंने कहा कि ट्राइब स्टेटस मिलने से पहाड़ के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सरकारी सेवाओं में आरक्षण सहित संवैधानिक अधिकारों का लाभ मिल सकेगा।
वहीं, 5वीं अनुसूची के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत किया जा सकेगा।
अनिल उप्रेती जी ने कहा, इसके साथ ही जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समाज का मालिकाना हक वापस मिलेगा।
पेसा एक्ट (PESA Act) लागू होने से ग्राम सभाएं बेहद शक्तिशाली होंगी और केंद्र से भी फण्ड मिलेगा। मूल निवास 1950 और देश का सबसे मजबूत भू-कानून स्वतः लागू हो जाएगा।
मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि पौड़ी सहित पूरे पर्वतीय क्षेत्र में तेजी से हो रहे भूमि हस्तांतरण और बाहरी दबाव को रोकने के लिए प्रभावी संवैधानिक संरक्षण आवश्यक है। 5वीं अनुसूची इस दिशा में एक महत्वपूर्ण समाधान है।

पौड़ी से कुलदीप सिंह गुसाईं जी ने कहा कि इस बार पर्वतीय समुदाय उसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी का समर्थन करेगा, जो अपने चुनावी घोषणा-पत्र में “उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची लागू करने” और “गढ़वाली-कुमाऊँनी समुदाय को ट्राइब स्टेटस देने” की मांग को स्पष्ट रूप से शामिल करेगा।
उत्तराखंड एकता मंच ने ऐलान किया कि 5वीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस की मांग को जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा तथा इस मुद्दे को पहाड़ के हर घर तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में, विमल चन्द्र नेगी, गणेश कुग्शाल गणी, त्रिभुवन उनियाल,केशर सिंह अस्वल, नमन चन्दोला, भास्कर बहुगुणा ,अजय रावत,जसपाल रावत, सुरेश बडथ्वाल , विनोद दनोसी ,कुसुम चमोली, नीलम रावत, मिनाक्षी रावत, पारवती देवी, प्रवीण अस्वल, संजय घिल्डियाल,अरविन्द रावत,अंकित भण्डारी, संतोष खंडूरी,मातंग मलासी, अनिल डेविड, सौरव रावत, आशीष रावत,देवेन्द्र सिंह, विकास चौहान, योगेन्द्र कुमार , कांता प्रसाद सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।
बैठक का सञ्चालन डॉ विन्तेश्वर प्रसाद बलोदी जी ने किया ।

