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गढ़वाल का गौरव शिखर पर: लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि बने देश के नए CDS* *लगातार तीसरी बार गढ़वाल कनेक्शन के साथ देश को मिला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, उत्तराखंड में खुशी की लहर*


*क्या गजब संयोग है???*

 

*गढ़वाल का गौरव शिखर पर: लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि बने देश के नए CDS*

 

*लगातार तीसरी बार गढ़वाल कनेक्शन के साथ देश को मिला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, उत्तराखंड में खुशी की लहर*

*देश के सर्वोच्च सैन्य पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के लिए एन. एस. राजा सुब्रमणि के नाम पर मुहर लग गई है। केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है और वे वर्तमान CDS अनिल चौहान के कार्यकाल पूरा होने के बाद पदभार संभालेंगे। उनकी नियुक्ति के साथ ही एक बार फिर गढ़वाल राइफल्स और उत्तराखंड का सैन्य गौरव राष्ट्रीय स्तर पर चमक उठा है।*

 

*गढ़वाल राइफल्स से गहरा नाता लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि का जुड़ाव गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन से रहा है। वे 24 अप्रैल 2022 से 27 जून 2025 तक गढ़वाल राइफल्स एवं गढ़वाल स्काउट्स के 22वें कर्नल ऑफ द रेजिमेंट भी रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने रेजिमेंट के आधुनिकीकरण, सैनिक कल्याण और ऑपरेशनल क्षमता को नई मजबूती दी।*

 

*गढ़वाल राइफल्स के 139 वर्षों के इतिहास में वे पहले ऐसे अधिकारी बने हैं, जिन्होंने फोर-स्टार जनरल का पद हासिल किया—जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।*

 

*शानदार अनुभव और नेतृत्व*

*लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि भारतीय सेना के बेहद अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं।* *वे वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय में मिलिट्री एडवाइजर जैसे अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें PVSM, AVSM, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे सम्मान मिल चुके हैं।*

 

*CDS के रूप में बड़ी चुनौती*

*देश के नए CDS के रूप में उनकी सबसे अहम जिम्मेदारी तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और थिएटराइजेशन*

*प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।* *रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से सशस्त्र बलों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।*

 

*लगातार तीसरी बार गढ़वाल कनेक्शन खास बात यह है कि देश के पहले CDS बिपिन रावत, वर्तमान CDS अनिल चौहान और अब नियुक्त एन.एस. राजा सुब्रमणि—तीनों का जुड़ाव गढ़वाल और उत्तराखंड से रहा है। इससे प्रदेश की सैन्य परंपरा और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।*

 

*वीरभूमि की पहचान और मजबूत,सैन्य जानकारों के मुताबिक, यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं बल्कि उत्तराखंड की वीरभूमि की उस परंपरा का सम्मान है, जिसने देश को लगातार वीर सैनिक और उत्कृष्ट नेतृत्व दिया है।*


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