कैंटोनमेंट बोर्ड के दो विद्यालयों में आपदा प्रबंधन एवं विद्यालय सुरक्षा को लेकर जागरूकता प्रशिक्षण आयोजित


नित्या वेलफेयर सोसाइटी द्वारा कानपुर कैंटोनमेंट बोर्ड के सहयोग से 10 एवं 11 अगस्त 2026 को कैंटोनमेंट बोर्ड के दो विद्यालयों में विद्यालय आपदा तैयारी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आपदा के समय सुरक्षा, बचाव, जोखिम की पहचान तथा आपातकालीन परिस्थितियों में सही तरीके से प्रतिक्रिया देने के प्रति जागरूक करना रहा।

पहले दिन 10 अगस्त को हैरिसगंज जूनियर हाई स्कूल में आयोजित प्रशिक्षण में लगभग 60 विद्यार्थियों एवं 5 शिक्षकों तथा विद्यालय कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. नरेश चंद्र शास्त्री एवं शिक्षकों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान किया।  दूसरे दिन 11 अगस्त को कैंटोनमेंट बोर्ड प्राथमिक विद्यालय, म्योर रोड, कैंट, कानपुर में प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें कक्षा 4 एवं 5 के 37 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती विनिता पांडेय सहित शिक्षक एवं विद्यालय कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

भूकंप, आग, भूस्खलन और चक्रवात से बचाव की दी जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को भूकंप, आग, भूस्खलन, चक्रवात एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई। चित्रों, प्रस्तुतियों और शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से बच्चों को आपदा की स्थिति को समझने तथा सही समय पर सही निर्णय लेने के बारे में जागरूक किया गया।

विद्यार्थियों को विद्यालय जोखिम आकलन के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि विद्यालय परिसर में मौजूद संभावित खतरों की पहचान करना और आपदा से पहले ही सुरक्षित व्यवहार अपनाना विद्यालय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

झुको, ढको और पकड़ो का कराया अभ्यास

भूकंप के दौरान सुरक्षा के लिए विद्यार्थियों को  “झुको, ढको और पकड़ो”की प्रक्रिया समझाई गई। बच्चों को बताया गया कि भूकंप के समय घबराने के बजाय शांत रहना, अपने सिर एवं शरीर की सुरक्षा करना, खतरनाक स्थानों से दूर रहना और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी है।

पांच इंद्रियों की गतिविधि के माध्यम से बच्चों को किया जागरूक

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ पांच इंद्रियों पर आधारित एक विशेष गतिविधि कराई गई। नित्या वेलफेयर सोसाइटी की टीम ने बच्चों को समझाया कि आपातकालीन परिस्थितियों में हमारी आंखें, कान, नाक, जीभ और त्वचा आसपास के संकेतों को समझने में किस प्रकार हमारी सहायता कर सकती हैं।

बच्चों को बताया गया कि किसी आपदा के समय ध्यानपूर्वक देखना, आवाजों को सुनना, किसी असामान्य गंध को पहचानना तथा आसपास की स्थिति को महसूस करना हमें संभावित खतरे को समझने में सहायता कर सकता है।

कुलदीप ने बताया विद्यालय सुरक्षा का महत्व

इस अवसर पर नित्या वेलफेयर सोसाइटी के सचिव श्री कुलदीप  ने विद्यार्थियों को विद्यालय सुरक्षा एवं आपदा तैयारी के महत्व के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों के सीखने और विकास का महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को सुरक्षा, आपदा से बचाव और आपातकालीन परिस्थितियों में सही प्रतिक्रिया की जानकारी देना भी आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल आपदा आने के बाद बचाव करना नहीं है, बल्कि आपदा से पहले संभावित खतरों की पहचान करना, तैयारी करना, सुरक्षित व्यवहार सीखना और आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की सहायता करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने बच्चों से कहा कि वे स्वयं सुरक्षित रहने के साथ-साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी आपदा सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने में कानपुर कैंटोनमेंट बोर्ड का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। नित्या वेलफेयर सोसाइटी ने दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, विद्यालय प्रशासन, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सहयोग और सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।

सोसाइटी की ओर से बताया गया कि यह कार्यक्रम सामुदायिक सेवा पहल के अंतर्गत पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किया गया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रारंभिक स्तर से ही सुरक्षा के प्रति जागरूकता, आपदा से निपटने की तैयारी, जिम्मेदार व्यवहार और बचाव के उपायों की समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।


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